PRATHM NEWS से रविंद्र किट्टी पंकज की रिपोर्ट
जालंधर:: भारत की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है लेकिन इनकम टैक्स देने वालों की संख्या मात्र 1.5 करोड़ है। जबकि प्रोफेशनल व्यापारी और ऊंची आमदनी वाले लोग अक्सर टैक्स के बचने के रास्ते ढूंढ लेते हैं सच्चाई यह है की नौकरीपेशा लोग जितना टैक्स सीधे तनख्वाह से कटता है वह देश की आमदनी की रीड है। इस वर्ग को सिर्फ टैक्स देने वाला नहीं बल्कि देश के ईमानदार नागरिक के तौर पर सम्मान मिलाना चाहिए। इनकम टैक्स विभाग के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ 8600 लोग ऐसे हैं जो हर साल 5 करोड रुपए से ज्यादा की आमदनी दिखाते हैं एक करोड़ से ऊपर आमदनी दिखाने वाले मात्र 42800 लोग हैं । प्रोफेशनल जैसे डॉक्टर वकील और चार्टर्ड अकाउंटेंट में से केवल 2200 लोग ही सालाना एक करोड से ज्यादा कमाई सरकार करते हैं इसके उलट 20 लाख से ऊपर सलाना कमाने वाले 4 लाख इनकम टैक्स का 63% प्रतिशत योगदान देते हैं। इस प्रक्रिया में वेतन भोगी ही सबसे ज्यादा टैक्स देता है क्योंकि उसका टैक्स टीडीएस के जरिए सीधा वेतन से काट लिया जाता है जबकि बड़े किसान और राजनीतिक पार्टियों टैक्स से पूरी तरह बच्चे रहते हैं। जो इमानदारी से टैक्स भरते हैं उन्हें कोई पूछता नहीं तो जो टैक्स नहीं भरते उन्हें कुछ होता नहीं सरकार को चाहिए ईमानदारी से टैक्स बनने वालों को सम्मानित करना चाहिए

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